दिललगी थी अब वो रही नहीं।

दिललगी थी अब वो रही नहीं।

दिललगी थी अब वो रही नहीं।
वो हमारे थे लेकिन वो हमारे रहे नहीं।
हमने उन्हें चाहा था दीवानों  पागलों की तरह।
उन्होंने हमारी दीवानगी को पागलपन समझ लिया।
हमने  उन्हें खुदा माना था।
उन्होंने हमें इंसान ना समझा।
हम तो उनकी एक आवाज में हाजिर थे।
उन्होंने हमारे  फरियाद को पढ़ने लायक ना समझा।
हम तो दूर होकर भी उनसे।
सिर्फ उनकी बात किया करते थे।
एक वो थे जो हमारे साथ होकर भी
  दुनिया भर की बातें किया करते मगर बस
हमारी बात ना किया करते थे।
दिललगी थी अब वो रही नहीं।
वो हमारे थे लेकिन वो हमारे रहे नहीं।