आज अचानक घर की याद सताने लगी।

आज अचानक घर की याद सताने लगी।

 आज अचानक घर की याद सताने लगी।
अपने मोहल्ले की गलियां याद आने लगी।
घर के आंगन की बचपन की यादें घर बुलाने लगी।
घर से अच्छा कोई आसार नहीं ये बतलाने लगी।
भूख लगता ही घर के खाने के किस्से याद आने लगे।
घर अपनी तरफ खींचने लगा रसोई घर की याद आती है l
घर का आराम याद नहीं लगेगा धूप में निकलते
घर के झगड़े याद आने लगे अनजानों से
चिकनी चोकड़ी बात करते याद आने बातें करते हुए l
घर की हर दीवार ज़ेहन आने लगी
जब एक नन्हे कलाकार को दीवार रंगते देखा l
जब मुझे इधर उधर भटकते देखा घर की दहलीज बुलाना लागी l