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आज मुस्कुरा लो यारों।

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आज मुस्कुरा लो यारों। आज मुस्कुरा लो यारों। क्या पता आने वाला कल आज से भी बतर  हुआ तो? कल मुस्कुराने तक का वक्त ना हुआ तो। उसे वक्त मुस्कुरा लेंगे आज को याद कर कर। हम जिंदगी भर ऐसे ही मुस्कुरा लेंगे। अपना बीता हुआ कल याद कर कर। और अपना आने वाला कल हंसी बना लेंगे। अपने चेहरे पर ही मुस्कान यूं ही रख कर। अगर आने वाली खुशियों की सौगात होगी। उसका भी इस्तकबाल होगा। एक मुस्कुराते चेहरे के साथ। और अगर खराब हुई हालत। और हुई गमों की बरसात। तो कुछ तो कम होगी । एक मुस्कुराते चेहरे के साथ। आज मुस्कुरा लो यारों।

दिललगी थी अब वो रही नहीं।

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दिललगी थी अब वो रही नहीं। दिललगी थी अब वो रही नहीं। वो हमारे थे लेकिन वो हमारे रहे नहीं। हमने उन्हें चाहा था दीवानों  पागलों की तरह। उन्होंने हमारी दीवानगी को पागलपन समझ लिया। हमने  उन्हें खुदा माना था। उन्होंने हमें इंसान ना समझा। हम तो उनकी एक आवाज में हाजिर थे। उन्होंने हमारे  फरियाद को पढ़ने लायक ना समझा। हम तो दूर होकर भी उनसे। सिर्फ उनकी बात किया करते थे। एक वो थे जो हमारे साथ होकर भी   दुनिया भर की बातें किया करते मगर बस हमारी बात ना किया करते थे। दिललगी थी अब वो रही नहीं। वो हमारे थे लेकिन वो हमारे रहे नहीं।

जिंदगी कटे कटती नहीं।

जिंदगी कटे कटती नहीं। जिंदगी कटे कटती नहीं।  हम उन्हें कितना भी पुकारे वो हमारी सुनती नहीं।  मेरी चाहत उनके लिए चाह कर भी कम होती नहीं। मेरी चाहत उनके लिए चाह कर भी कम होती नहीं।  क्या करें उनका ख्याल दिमाग से हटता ही नहीं?  कितनी भी कोशिश करूं निगाहें उनसे हिलती ही नहीं।  उनके आगे आते ही सांस चलती नहीं।  धड़कनों पर काबू रहता नहीं।  उनके दीदार से ही मैं होश में रहता नहीं। जिंदगी कटे कटती नहीं।  उन्हें तो हमारे दिल का हाल पता भी नहीं।  उनसे मिलकर दिल बस में रहता नहीं।

आज अचानक घर की याद सताने लगी।

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आज अचानक घर की याद सताने लगी।  आज अचानक घर की याद सताने लगी। अपने मोहल्ले की गलियां याद आने लगी। घर के आंगन की बचपन की यादें घर बुलाने लगी। घर से अच्छा कोई आसार नहीं ये बतलाने लगी। भूख लगता ही घर के खाने के किस्से याद आने लगे। घर अपनी तरफ खींचने लगा रसोई घर की याद आती है l घर का आराम याद नहीं लगेगा धूप में निकलते घर के झगड़े याद आने लगे अनजानों से चिकनी चोकड़ी बात करते याद आने बातें करते हुए l घर की हर दीवार ज़ेहन आने लगी जब एक नन्हे कलाकार को दीवार रंगते देखा l जब मुझे इधर उधर भटकते देखा घर की दहलीज बुलाना लागी l